रविवार, 13 जून 2010

इस ब्लॉग को मै क्या नाम दूं....... ?

....................और देखतें ही देखतें हमने एक और ब्लाग का निर्माण कर दिया.............और फिर पशोपेश में पड़ गया की इस नवजात ब्लॉग को क्या नाम दिया जायें.......शरीर के उपरी माले ने अपने स्तर से तमाम नाम सुझाये भी..........तभी सहसा एक नाम दिमाग में कौंधा... '' उफान '' .............नाम जम गया...........वैसे शैक्सपियर साब ने तो यहां तक कह दिया है,  whatz their in name मतलब नाम में क्या रखा है...........लेकिन शैक्सपीयर अंकल यहां ब्लॉग की इस दुनियां में नाम का वहीं महत्व है जो जूते में बाटा का और नमक में टाटा का है...........क्योकीं इस वर्चुअल दुनियां में एक दूसरे को नाम से ही जाना जाता है................ब्लॉग जगत के कुछ बड़े दिग्गज, कुछ बड़े काकस, कुछ बड़े सितारे अंगद की तरह अपना पांव जमाये हुये है जैसे रबीश भईया, अविनाश चिलांडू, किशोर अजवाणी, नया ठौर वाले संजीव जी, अनकही वाली पश्यन्ती शुक्ला, पाखी की दुनियां और.......................... ये फेहरिश्त बडी लम्बी है............इन महानुभावों को भी तो अपने ब्लाग के नामकरण संस्कार के वक्त थोड़ा सोचना पडा होगा.........लेकिन ये हाजत तीमरदारी और मिज़ाजपुर्शी के बादशाह है और मै ठहरा बोम लेकिन अतवार के इस पावन मौके पर मै ईश्वर को साक्षी मानकर संकल्प लेता हूं की अब नियमित दिमागी व्यायाम के रुप में पढ़ूगां और यथासंभव लिखा भी करुगां । शेष मिलने पर..............खैर फिर मिलेंगे.............

1 टिप्पणी:

  1. ए अमित बाबू खुद कमेंट करो और खुश हो जाओ क्योकिं इस ब्लॉग पर तो कोई आने वाला नही है..............।

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